कलयुग की अयोध्या में प्रभु राम को मिले
दूसरे वनवास को चरितार्थ करती इन पंक्तियों के साथ आप सभी को प्रभु राम के जन्म पर
रामनवमी की हार्दिक शुभकामनाएँ…
राम-राम मय है ये धरती, त्रेता से ले कलयुग
तक...
कहीं राम का शंख नाद था, वहीं राम की है
अब गूंज|
राम-राम मय है ये धरती, त्रेता से ले कलयुग
तक...
कहीं अंत था अहंकार का, वहीं प्रतीक्षा
है अब गृह की|
राम-राम मय है ये धरती, त्रेता से ले कलयुग
तक...
कहीं दमन था सृजन के लिए, वहीं प्रविष्टि
पर है अब रोक|
राम-राम मय है ये धरती, त्रेता से ले कलयुग
तक...
("कैलाश
कीर्ति (रश्मि)" द्वारा रचित)
