उलझनें
चाहे जितनी उलझी हों,
सुलझाने
का कोई न कोई रास्ता दिखाते हैं, दोस्त!
संसार
की ऊबड़-खाबड़ पगडंडियों पर,
चलने
का कोई न कोई सबक सीखते हैं, दोस्त!
अपनों
से मिले दर्द को भी,
भुलाने
का कोई न कोई बहाना सुझा जाते हैं, दोस्त!
कैसे
कहूँ कि जब तक जिंदगी से जुड़े किस्से,
सुना
न लूँ उन्हें, दुनिया से बेगाने नज़र आते हैं,
दोस्त!
दोस्तों
की खट्टी-मिट्ठी नोक-झोक हो या फिर प्यार वाली बारिश हर पल बस अपनी मौजूदगी का एहसास
दिला जाते हैं दोस्त...HAPPY FRIENDSHIP DAY!!!
स्वरचित रश्मि श्रीवास्तव “कैलाश कीर्ति”







