Hindi Writing Blog

मंगलवार, 25 अक्टूबर 2022

दीपावली विशेषांक - कलयुग की आधुनिकता पर भारी त्रेतायुग की प्राचीनता

 

दीपावली  की शुभकामनाएँ


दोस्तों, सबसे पहले आप सभी को प्रकाश पर्व दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएँ!!!

जैसा कि इस आर्टिकल के विषय से ही आपको यह पता चल गया होगा कि आज के मेरे इस दीपावली विशेषांक की यात्रा काफी कुछ आपको आध्यात्म की ओर ले जा रही है बावजूद इसके अगर हम इस विषय से मिली सीख पर थोड़ा सा भी ध्यान दें तो यह शायद बेहद जरूरी है कि आज के इस भौतिकतावादी और लिप्सा से भरे जिस दौर को हम जी रहे हैं उसमें अगर कलयुग हमें आधुनिकता की ओर धकेल रहा है तो कहीं न कहीं त्रेतायुग की प्राचीनता से मिलती सकारात्मक ऊर्जा आज भी हमारे कल को सँवारने का माद्दा रखती नजर आ रही है। जी हाँ दोस्तों, एक तरफ आधुनिकता के लबादे को ओढ़े हम मोबाइल फोन पर अपनी उँगलियों को फेरते हुए अक्सर ये दावा करते हैं कि हम खुद को पूरी दुनिया से जोड़ रहे हैं लेकिन वास्तविकता यह है कि अपने घर की चारदीवारी में ही अपने आस-पास रह रहे रिश्तों को ही हम अच्छी तरफ संभाल पाने में असफल साबित हो रहे हैं। इसे बताने या इसपर चर्चा करने की भी जरूरत अब शायद शेष नहीं बची है फिर भी इन सबके बीच जब हम अपनी प्राचीन संस्कृति से उपलब्ध कराए गए कुछ उत्सवों/ त्योहारों को मनाते हैं तो एक बार फिर हम मिलजुल कर रहने और साथ-साथ त्योहारों को एक आँगन, एक मोहल्ले, एक गली, एक शहर और एक देश के साथ मनाने का जज्बा हासिल कर लेते हैं, जो कहीं न कहीं हमारी उस प्राचीन सभ्यता और संस्कृति से हमें जोड़ता है जो केवल कुछ वर्षों से नहीं बल्कि सदियों से हमारे इस समाज का अमूल्य हिस्सा रही है।

दोस्तों, बात जब हमारी प्राचीन सीख और आचार संहिताओं की हो तो त्रेतायुग में जन्में प्रभु राम और उनके इर्द-गिर्द घूमते वो सभी पात्र जो सत्य और धर्म के मार्ग पर चलना सिखलाते हैं, आज के इस कलयुग में भी हम सभी के लिए अनुकरणीय बन जाते हैं। जिस प्रकार प्रभु राम ने रावण वध के उपरांत चौदह वर्षों का वनवास पूरा कर कार्तिक अमावस्या (दीपावली) के शुभ दिन अयोध्या नगरी में अपनी वापसी की तो अयोध्या वासियों को हर्ष और उल्लास के आनंदमयी वातावरण में लाखों नकारात्मक परिस्थितियों के बावजूद जीवन को कैसे जीया जाए इसकी अनमोल सीख मिल गई जिसकी आवश्यकता आज के इस आधुनिक परिवेश में हम सभी को कहीं न कहीं हर पल महसूस होती है। हम माने या न माने त्रेतायुग से मिली इन बातों तक आज भी हमारी पहुँच हमारे घरों में रह रहे बूढ़े बुजुर्गों के माध्यम से रोज़मर्रा की जिंदगी में हो ही जाती है।

कहते हैं दोस्तों कि जब प्रभु राम 86 दिनों का युद्ध समाप्त कर लंका से पुष्पक विमान द्वारा अयोध्या जाने के लिए निकले तो वे सबसे पहले अयोध्या नहीं गए अपितु वो एक-एक कर उन सभी के पास गए जिन महर्षियों, योगियों (सर्वप्रथम वो भारत भूमि पर कुंभज ऋषि कहे जाने वाले ऋषि अगस्त्य के सुंदर दण्डकवन में स्थित आश्रम में उतरे) पशु-पक्षियों,नदियों (सुंदर दण्डक वन के बाद वो चित्रकूट पहुँचें वहाँ से उन्होने माँ यमुना और माँ गंगा के दर्शन हेतु तीर्थराज प्रयाग का रुख किया जहां वे बंदरों और ब्राह्मणों को दान देने के लिए रुके साथ ही वे ऋषि भारद्वाज के आश्रम भी गए) के पास गए जो उनकी इस विजयगाथा में कहीं न कहीं से शामिल थे और जिन्होने उनकी कठिन परिस्थितियों में किसी भी प्रकार सहायता की थी। प्रभु राम का ये चरित्र आज के इस कलयुग में उनकी कृतघ्नता  की उस भावना का संकेत देता है जिसे हम सभी अपनी दैनिक दिनचर्या में अगर शामिल कर लें तो एक दूसरे को दिए जाने वाले सम्मान से ही हमारी काफी मुश्किलें कम हो जाएंगी।

त्रेता युग में प्रभु राम के चरित्र में ऐसी ही अनगिनत विशेषताएँ थीं जो कलयुग भी में भी मर्यादा पुरुषोत्तम बने रहने की उन प्राचीनताओं की ओर हमें आकर्षित करती हैं जिनमें शांतचित्तता, विनम्रता, वचन निभाने की क्षमता, आज्ञाकारिता, त्याग और बलिदान की भावना तथा स्वार्थ से कोषों दूर रहने की उनकी दृढ़ इच्छा शक्ति उन्हें रामायण कालीन पात्रों में न केवल सर्वोत्तम स्थान प्रदान करती है अपितु आज के इन मौजूदा हालात में स्वयं साक्षात पूर्ण ब्रह्म होते हुए भी सुख-दुख को बराबर से सहन करते हुए मानव जीवन को किस प्रकार संयमित होकर जिया जाए इसकी भी शिक्षा दे जाती है। त्रेता युग में प्रभु राम के किरदार से अलग होकर अगर हम माता सीता और बंधु लक्ष्मण के चरित्र की प्रासांगिकता आज के इस युग में विश्लेषित करें तो हमें हर रोज बहुत कुछ नया ग्रहण करने को मिलेगा। फिर चाहे सीता और लक्ष्मण के साथ उर्मिला का बलिदान हो या भातृ प्रेम पर न्योछावर भरत का जीवन। ये सभी भले ही आज के आधुनिक कहे जाने वाले समाज में सही न बैठें पर अगर हमने इन्हें मन और वचन से अंगीकार कर लें तो इतना सुनिश्चित है कि आज के इस कलयुग में न केवल हमारा खुद का चरित्र सुदृढ़ और बलवान होगा बल्कि उनके विचारों और आदर्शों को लेकर हम अपने आने वाले कल की नयी तस्वीर चित्रित कर सकेंगे।

दोस्तों, इन दिनों दुनिया के मानचित्र पर काफी उतार-चढ़ाव चारों तरफ दिख रहा है – कहीं युद्ध की विभीषिका है (रूस-यूक्रेन युद्ध), तो कहीं सूखा और अकाल (पश्चिमी देश और समस्त यूरोप), तो कहीं मंदी की आहट है। परंतु, इन सबके बीच संभावनाओं के कमियों के बावजूद हालात बेहतर बनाने की ओर अगर इस विश्व का रुख आने वाले समय के साथ सकारात्मक होता जाए और प्राचीनता से निकली सीख को अपनाकर यह समस्त संसार मानव हित के बारे में सोचना प्रारम्भ करें तो इससे बेहतर शायद ही कुछ होगा।

देश और दुनिया में सकारात्मक ऊर्जाओं का संचार निर्बाध गति से चलता रहे, ऐसी कामना कहीं न कहीं हम सबके अन्तर्मन में समाई रहती है हम सभी की यह आकांक्षा इस नववर्ष में दीपपर्व दीपावली के साथ पूरी हो इसी आशा के साथ इस विशेषांक में आज के लिए बस इतना ही। अगले अंक में फिर मिलेंगे तब तक के लिए जय हिन्द, जय भारत!!!   


बुधवार, 5 अक्टूबर 2022

Happy Dussehra

 

दशहरा


राम-रावण युद्ध की,

रणभेरियाँ ललकारती।

दसों दिशाएँ प्रभु राम के,

तेज को निहारती।

धर्म का स्वरूप ही,

अद्भुत, अलौकिक, अदम्य है।

सृष्टि का संदेश ये,

वो हर दिशा में भेजती।

अधर्म के माया तले,

रावण का ज्ञान धूमिल हुआ।

युगों-युगों से ये गाथा,

सभी के अन्तर्मन को है भेदती।

फिर भी तम से भरी,

अधर्म की यह राह,

हर नित हमें,

धर्म के मुख से है मोड़ती।

ईर्ष्या, लोभ, मोह, मद जैसी बुराइयाँ,

कलयुग में भी सतयुग के रावण,

की याद से हर किसी को है झिंझोरती।

आइये इस दशहरा एक बार फिर,

मिलकर करें प्रभु राम का उद्घोष हम।

हमारी अंतरकाया में पल रही बुराइयों को,

दे दें अब विराम हम।

आज और अभी से,

अधर्म विरुद्ध छिड़े,

इस युद्ध को अंजाम दें।

फिर बजेंगी रणभेरियाँ,

राम रूपी धर्म की,

होगी पुनर्स्थापना।

राम-रावण युद्ध की रणभेरियाँ ललकारती...

                      स्वरचित रश्मि श्रीवास्तव “कैलाश कीर्ति”

 

दोस्तों, धर्म के पथ पर चलने के लिए साहस और धैर्य की हर पल आवश्यकता हमें अपनी रोज की दिनचर्या में महसूस होती जिसके लिए प्रभु राम का चरित्र और आचरण हम सभी को हर पल दिशा दिखलातें हैं। ऐसे प्रभु राम द्वारा दिये गए इस शुभावसर की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएँ


बुधवार, 14 सितंबर 2022

हिन्दी दिवस

 

हिन्दी दिवस

दोस्तों, आज हिन्दी दिवस की इस शुभ बेला को प्रतिवर्ष दोहराए जाने का अर्थ बस इतना है कि हिन्दी भाषा की गरिमामयी यात्रा स्वयं में समृद्ध साहित्य की ऐसी परंपरागत शुभकामनाओं का अध्याय जोड़ती जाए जिससे आदिकाल से चली आ रही अभिव्यक्तियों को जब कभी भी शब्दों में बांधने का प्रयास हो तो कोई कोना छूटा ना रह जाए। हिन्दी की ये प्रगति हमेशा यूं ही अनवरत चलती रहे, इसी आकांक्षा के साथ... “हिन्दी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ”

 गागर में सागर सम्हाले,

अनवरत प्रगति प्रशस्त किए ।

साहित्य सम्पदा अनंत सँजोये,

बढ़ते समय को साथ लिए ।

जोड़े जन-जन को भाषा का,

अद्भुत रूप लिए ।

गागर में सागर सम्हाले...

हम सबकी हिन्दी बस बढ़ती चले,

अलंकृत साहित्य स्वरूप लिए ।  

विशिष्ट बनकर विशिष्टतम का भान कराए,

जब जब व्याकरण संग मिले ।

सहज हो चले जब करनी हो बात हमें,

ऐसी मीठी भाषा के अभिमान की बिंदी ।

भारत माता के भाल सजे,

अनंत काल की गति लिए ।

साहित्य संपदा और सादगी का,

ये अप्रतिम मेल बस यूं ही चला चले ।

गागर में सागर सम्हाले... (स्वरचित रश्मि श्रीवास्तव “कैलाश कीर्ति”)

  


सोमवार, 15 अगस्त 2022

भारत का अमृत महोत्सव

 

75th Independance Day

वतन पर मर मिटने की सदाएँ जब भी आएंगी

चमक जाएगा हर चेहरा दिशाएँ गीत गाएँगी

वतन पर मर मिटने की सदाएँ जब भी आएंगी...

आग से खेल जाएगा हर कोई, हटा कर भेद सब सारे  

खनकती चूड़ियों वाले हाथों में भी खड्ग होगी

वतन पर मर मिटने की सदाएँ जब भी आएंगी...

लहरा उठेगा तिरंगा, मिटा जाएंगी दूरियाँ सारी  

राखी बंधे हाथों में भी तब खंजर होगा

वतन पर मर मिटने की सदाएँ जब भी आएंगी...

बड़े-छोटे, तेरे-मेरे, अपने-पराए के हर दर्द को पीछे छोड़ जाएंगी

वतन पर मर मिटने की सदाएँ जब भी आएंगी...

                            स्वरचित रश्मि श्रीवास्तव “कैलाश कीर्ति”

 

जोश जुनून और हर्षोल्लास के मनोभावों को एकता और एकजुटता के बंधन में बांधते भारत राष्ट्र के 75वें स्वतन्त्रता दिवस की आप सभी को बहुत-बहुत बधाई

शनिवार, 2 जुलाई 2022

खुद का वजूद तलाशती नारी

 

Women-Existence

ज़िद थी हमें आसमां को छूके आने की,

पर पलकों पर ख्वाबों को सजाने से भी डरते हैं,

कहीं पर कतर न दे कोई उड़ते परिंदे का,

यही दर्द जमाने से छिपाये फिरते हैं,

रोशनी बिखरकर आएगी एक दिन राहों में हमारी,

बस इसी एक उम्मीद पर,

खुद का वजूद खुद में गुमाए फिरते हैं।

ज़िद थी हमें आसमां को छूके आने की…

                        (स्वरचित रश्मि श्रीवास्तव “कैलाशकीर्ति)

राधा ओ राधा!, जरा मुझे एक कप चाय दे दो – मुझे आज ऑफिस जल्दी निकलना है। अभी सुबह के पाँच ही तो बजे हैं, साढ़े चार बजे की अलार्म क्लॉक पर उठी राधा की दिनचर्या हर रोज कुछ ऐसे ही शुरू होती है। पतिदेव की मॉर्निंग टी की फरमाइश, तो ससुर जी के लिए पेपर और चश्मा ढूंढकर देने की, सासू माँ के नहाने का गरम पानी क्योंकि उन्हें सुबह सवेरे नहाँ धोकर राधा-कृष्ण की पूजा जो करनी है साथ ही रिंकू-पिंकी का स्कूल बैग-लांच बॉक्स – सबकुछ किसी सुपर वूमेन  की तरह निपटाती राधा को ठीक नौ बजे स्कूल पहुंचना है, आज स्कूल में प्रिंसिपल मैम के साथ उसकी मीटिंग है जिसमें क्लास टीचर होने के नाते क्लास के तमाम बच्चों की monthly प्रोग्रेस उनसे शेयर करनी है। एक अकेली राधा और उसके समर्पण, प्रेम, त्याग और निस्वार्थ भावनाओं की रसलहरियों से सिंचित होता घर का आँगन और उस घर के आँगन से बाहर निकलकर आशाओं, कुछ कर गुजरने की उसकी कोशिशों तथा खुद के वजूद को इस बदलते समाज के साथ फिट बैठाने की उसकी जिद ने उसे घर की चार-दीवारी से बाहर निकालकर समाज के उस वृहद दायरे में लाकर खड़ा कर दिया है जहां कामकाजी चुनौतियों के साथ संतुलन बनाकर उसे हर पल, हर क्षण एक स्त्री होने के एहसास को जिंदा बनाए रखने के लिए मजबूर कर दिया जाता है।

वर्तमान परिस्थितियों में technology से भरी इस 21वीं सदी में भी इस दुनिया ने स्त्रियों के अस्तित्व और उनकी सकारात्मक ऊर्जा को स्वीकारने में कहीं न कहीं एक लचर रवैया अपना रखा है। जब कभी भी पुरुष संग स्त्री समानता की बात आती है तो ये सब बातें सिर्फ कुछ खाली उँगलियों से निकले शब्दों तक आकर सिमट जाती हैं, जो किताबी बातों के अलावा ज्यादा कुछ नहीं। वरना रोज़मर्रा की जिंदगी में तो आज भी घर के अंदर और बाहर का सामंजस्य बनाए रखने की ज़िम्मेदारी स्त्रियों पर ही है। बने-बनाए करियर को छोड़कर अगर पारिवारिक जिम्मेदारियों को संभालने की बात हो तो वहाँ भी ये समाज दृढ़ होकर स्त्री मंशा से ही हाँ की उम्मीद लगाता है। न जाने क्यों ऐसा है? अच्छे पदों पर कार्य कर रही महिलाओं को भी घर के फैसलों में निर्णायक बने रहने की भूमिका बामुश्किल ही मिल पाती है।

कभी तो नारी मन को एक पल ही लगता है उसने जीवन में सबकुछ हासिल कर लिया, वहीं दूसरे पल उसे इस बात का एहसास भी होता है कि उसका अपना तो कुछ है ही नहीं। कितनी अजीब है न इन सामाजिक रिश्तों की कशमकश? आज के इस आधुनिक समाज ने इतना तो साबित कर दिया है कि स्त्रियों को विधाता ने सृष्टि संतुलन की ऐसी कला दी है जो सफलतापूर्वक वो जीवन के हर मोर्चों पर निभाती है – कभी एक बेटी बनकर तो कभी पत्नी, बहू, और माँ बनकर लेकिन इन सबके बावजूद एक प्रश्न जो आज भी स्त्री समाज के लिए लाख टके का है कि इन सभी सफल मोर्चों पर लड़ते-लड़ते क्या उनका स्वीकरण इस समाज द्वारा उसी प्रकार हो पाया है जैसा पुरुषों का? आखिर क्यों जब त्याग और बलिदान की बात आती है तो सारा समाज मिलकर स्त्री जाति की ओर ही उंगली करता है, पुरुषों की ओर क्यों नहीं? और ताज्जुब तो इस बात का है कि इन उँगलियों में पुरुषों के साथ कुछ उँगलियाँ स्त्रियों की भी हैं? ऐसा क्या है जो नारी आज भी अपना सर्वस्व देने के बाद भी अपने ही वजूद को अपने में ही तलाशने के लिए मजबूर है।

 आशा बस इस बात की है कि नारी और पुरुष के संतुलन का संदेश देती प्रकृति की बातें हमारी रोज़मर्रा की जिंदगी में लागू हों और स्त्रियों को वो मिले जिसकी वो हकदार हैं।

            दोस्तों, ये थी मेरी एक ऐसी रचना जो मेरे परिवेश के इर्द-गिर्द हर दिन घटती है। मैं कुछ कर तो नहीं सकती पर अपनी लेखनी के माध्यम से एक बात जरूर आप से साझा कर सकती हूँ कि आगे बढ़कर स्त्रियों को सम्मान देने की शुरुआत करें ताकि संसार के लिए सकारात्मक उर्जाओं का एक नया दौर आरंभ हो सके। फिर देखिये नारी की उस उड़ान को जिसे वो अपने दर्द के पीछे छिपाकर रखती आई है।

          आज के लिए बस इतना ही अगले अंक में फिर मिलेंगे तब तक के लिए जय हिन्द, जय भारत!!!


रविवार, 8 मई 2022

Happy Mother's Day

 

Mother's Day Image

धरती में है माँ की खुशबू,

अंबर शीश झुकाए है ।

कल्पित छल की ओढ़ चुनरिया,

नदिया जल बरसाए है ।।  

अठखेली करती वसुधा से ममता,

सीख हमें दे जाए है ।

तरु पल्लव की पुष्प मल्लिका,

हर्ष गान जब गाए है॥

प्रकृति सहेजे माँ स्वरूप को,

जब पुष्पों की कोमल पंखुड़ियाँ,

मंद बयार सहलाए है ।

माँ की महिमा इस जग में,

सूरज चाँद भी गाएँ हैं ॥

सूरज की स्वर्णिम आभाएँ,  

जब माँ-आशीष में मिल जाए है।  

चन्द्र-चाँदनी की शीतलता

माँ लोरी संग गाए है ॥

प्रकृति मिलन का यही आईना,

हम सब मातृ रूप में पाएँ हैं’ ।

धरती में है माँ की खुशबू...

          स्वरचित रश्मि श्रीवास्तव “कैलाश कीर्ति”

 

प्रस्तुत पंक्तियों में “कल्पित जल की ओढ़ चुनरिया, नदिया जल बरसाए है अर्थात नदी जब पानी के लहरों को लेकर कर पहाड़ों से चलती है तो धरती माँ की गोद में कही उठती है तो कहीं गिरती है, कहीं छुपती है तो कहीं सामने आ जाती है। कल्पनाओं का ये बादल लिए जब वो आगे बढ़ती है तो धरती माँ उस पर अपना सारा स्नेह लुटा देती हैं। प्रकृति का दिया ये संदेश उन सभी संतानों के लिए है जिनकी माँ सारे बंधन से परे होकर अपनी ममता आजीवन अपने बच्चों पर लुटाती हैं फिर चाहे उसमें समर्पण, त्याग, बलिदान, आलोचना और निंदा जैसी अनगिनत मनोभावनाओं का उतार-चढ़ाव भी शामिल क्यूँ न हो...Happy Mother’s Day!!!

 

 

 


रविवार, 10 अप्रैल 2022

रामनवमी की हार्दिक बधाई

Happy Ramnavmi



              नौमी तिथि मधु मास पुनिता...

               भए प्रकट कृपला दीनदयाला कौसल्या हितकारी।

               हरषित महतारी मुनि मन हारी अद्भुत रूप बिचारी॥

               लोचन अभिरामा तनु घनस्यामा निज आयुध भुजचारी।

                भूषन बनमाला नयन बिसाला सोभासिंधु खरारी॥

पृथ्वी वासियों का प्रभु राम से मिलन कराती रामनवमी, प्रभु के आचार – व्यवहार को मानवजाति के निज जीवन में सम्मिलित किए जाने का संदेश देती है साथ ही हमें इस बात के लिए तैयार करती है कि जीवन में कठिनाई चाहे जितनी आए हम सभी को धर्म के पथ पर अडिग होकर चलना है क्योंकि...

एक तरफ मानव खुद एकल चलेगा

अगर चुना अधर्म का साथ।

वही दूजी ओर मिलेगी धर्म पथ पर

प्रभु राम साथ की सौगात...

तो बोलो प्रभु राम की जय

प्रभु राम का साथ सदैव हम सभी के साथ यूं ही बना रहे इसी कामना संग आप सभी को रामनवमी की हार्दिक शुभकामनाएँ...   




 

शुक्रवार, 18 मार्च 2022

होली की हार्दिक शुभकामनाएँ

 

Happy Holi


प्रकृति के दिए रंगों से सजी

इस रंग-रंगीली दुनिया में

असली होली तो तब होगी

जब बहुजन हिताय, बहुजन सुखाय

की सहस्त्रों धाराएँ एक बार फिर

जगत मध्य कदम ताल करेंगी।

जीवन का स्पंदन तब

भय के घेरे से मुक्त बहेगा

जब रंगों की बौछार में

मानव जाति का समावेशन भी

खुलकर प्रकृति संग जीवन को

जी लेने की हुंकार भरेगा

असली होली तो तब होगी...

   स्वरचित रश्मि श्रीवास्तव “कैलाश कीर्ति”

 

आइये इस होली अपने देश संग समग्र संसार में शांति स्थापना और निर्विघ्न जीवन के रंगों की छटा इस धरा पर सदा सर्वदा बिखरते रहने की कामना करते हुए इस रंग महोत्सव को सबके संग मिलकर मनाएँ, आप सभी को सामाजिक सद्भाव और एकता का संदेश देती होली की हार्दिक शुभकामनाएँ!!!


मंगलवार, 8 मार्च 2022

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस

 

Happy Woman's Day



नारी की महत्ता का गुणगान करती इन पंक्तियों के साथ अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की आप सभी को शुभकामनाएँ

 सृष्टि के संयोग से

जब नर संग नारी बनी

चलने लगा ब्रह्मांड तब ये

वसुधा भी पूरित हुई

आकाशगंगा से निकलती

जीवन ज्योति तब कहीं आगे बढ़ी

स्नेह और वात्सल्य का

जब ले समागम

नर संग नारी चली

महक उठा संसार तब ये

हर घर की दहलीज

भी पूरित हुई, सृष्टि के संयोग से... (1)

अश्रुओं के सैलाब को जब

नयनों में रोक रखने

की शक्ति और अधरों पर मुस्कान ले  

जब नारी आगे बढ़ी

संयम और धैर्य का रुख देख

तब राधा और सीता भी

प्रभु कृष्ण और प्रभु राम के

आगे जुड़ी

पूर्ण हुआ दुनिया का स्वप्न

तब ये प्रकृति भी

पूरित हुई, सृष्टि के संयोग से... (2)

 स्वरचित रश्मि श्रीवास्तव “कैलाश कीर्ति”

शनिवार, 26 फ़रवरी 2022

Bollywood पर लगा कोरोना का ग्रहण: हटना है जरूरी

 



Bollwood Vs Corona

दोस्तों, अभी कुछ दिनों पूर्व तक कोरोना के नए variant Omicron ने एक बार फिर से दुनिया में दहशत फैलाने का सिलसिला जारी रखा वहीं दिसंबर 2019 में चीन के वुहान शहर से निकले इस वायरस ने वक्त के साथ लोगों के जीवन को व्यक्तिगत रूप से किस हद् तक प्रभावित किया है इसका अंदाजा हमें अपनी रोज़मर्रा की जिंदगी से भली-भांति पता चल ही रहा है बावजूद इसके कोरोना से हुए नुकसान का राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कितना प्रभाव पड़ा है ये पता लगा पाना नामुमकिन है क्योंकि एक तरफ अगर श्रीलंका, पाकिस्तान, वेनेजुएला जैसे देश आर्थिक दिवालियेपन की ओर अग्रसर हैं वहीं दूसरी ओर दुनिया की बड़े देशों की आर्थिक स्थिति भी कुछ ज्यादा अच्छी नहीं है। कोरोना ने दुनिया के विकास को गति देने वाले ज़्यादातर सेक्टर्स पर अपनी तबाही के निशान छोड़े हैं।

दोस्तों, लोगों को इस महामारी के चलते हुए नुकसान से उबरने में एक लंबा अरसा लगेगा और रही बात अपने देश की तो भारत दुनिया के उन देशों में शामिल है जहाँ कोरोना की मार सबसे ज्यादा पड़ी है। कोरोना की महामारी ने हमें न केवल शारीरिक रूप से पीड़ा पहुंचाई है बल्कि मानसिक स्तर पर भी काफी आघात दिया है जिसका ताजातरीन उदाहरण भारतीयों के मानसिक सेहत का ख्याल रखने वाले Bollywood पर भी कोरोना के असर से पूर्णतया परिलक्षित होता है क्योंकि ये Bollywood ही तो है जिससे निकलने वाले किरदार हमारे समाज के लोगों को जीवन जीने की राह दिखाते हैं इतना ही नहीं हमारी जिंदगी में शामिल जीवन के प्रत्येक पहलू को छूते रंग-बिरंगे अंदाज से खुशियों को सराबोर करा जाते हैं फिर चाहे वो जज्बा देशभक्ति से जुड़ा हो या फिर शादी-ब्याह के मौकों पर झमाझम बजते संगीत और नृत्यों का सिलसिला हो। हमारे जीवन का अभिन्न हिस्सा बनीं Bollywood की अनगिनत फिल्में और इनसे जुड़े रिश्ते-नातों को कोरोना की इस महामारी ने कहीं निगल सा लिया है वरना तो नई-नई फिल्मों के गाने आते ही नुक्कड़ और चौराहों पर स्पीकर के माध्यम से बजते गाने हम सभी के जीवन में उल्लास और हर्ष की जो बयार लेकर आते हैं उन्हें हम कभी अकेले में तो कभी सबके साथ मिलकर गुनगुनाते हैं।

दोस्तों, कोरोना पूर्व 2019 का शानदार साल हमारी मुंबइया फिल्मों के लिए भी बेहतरीन रहा जब बॉक्स ऑफिस पर प्रदर्शित की गई फिल्मों में से कुल 17 फिल्में 100 करोड़ रुपये की कमाई करने वाले क्लब का हिस्सा बनीं। इन फिल्मों में तो ऋतिक रोशन अभिनीत फिल्म War ने 318 करोड़, ऊरी, कबीरसिंह, हाउसफुल 4, मिशन मंगल, दबंग 3 और भारत जैसी फिल्मों ने 200 करोड़ कमाएं, लेकिन दिसंबर 2019 में कोरोना के शुरू होने के बाद 2020 में केवल अजय देवगन अभिनीत तानाजी ही 280 करोड़ का बिजनेस कर पाई और ये सिलसिला तब रुक गया जब कोरोना महामारी के तांडव के चलते सुरक्षा कारणों से अधिकतर फिल्मों की सूटिंग बंद हो गई। थिएटर/सिनेमाहाल बंद होने से अँग्रेजी मीडियम और बागी 3 जैसी फिल्मों पर खासा असर पड़ा। 

दोस्तों, Bollywood की फिल्में थियेटर में न हों और उनके गानें आम लोगों की जिंदगी का हिस्सा ना बनें तो कहीं न कहीं सबकुछ सूना सा ही लगता है क्योंकि हम मानें या न मानें ये गानें, ये फिल्में हमें मनोरंजन के साथ मानसिक खुशी देने का एक अच्छा जरिया हैं, तभी तो कोरोना के बीच आई दक्षिण भारतीय फिल्म “पुष्पा” के हिन्दी वर्जन के गाने और फिल्म ने पूरे उत्तर भारत में धूम मचा दी। अल्लू अर्जुन अभिनीत इस फिल्म के गाने “तेरी झलक अशरफी” और डायलॉग “मैं झुकूँगा नहीं” ने सभी पर अपना अच्छा खासा असर छोड़ा। तभी तो इंस्टाग्राम और यूट्यूब रील से लेकर अलग-अलग प्लेटफार्मों पर अल्लू अर्जुन के डांस की कापी करते लोग बड़े आसानी से आपको दिखाई दे जाएंगे।

Bollywood Image
दोस्तों, ये तो रहीं थोड़ी खुशमिजाजी की बातें लेकिन इन सबसे कहीं अधिक चिंताजनक रही Bollywood industry से जुड़े कुछ कलाकारों की स्थिति का डवांडोल होना और उनके जीवन पर असर डालने वाले घटनाक्रमों का हम सभी के सामने खुलकर आना। इन कलाकारों के प्रशंसक भी इन सबसे से कहीं न कहीं खुद को आहत पाते हैं। कोरोना काल में सुरक्षा कदमों के चलते फिल्मों के साथ टीवी चैनल कार्यक्रमों की सूटिंग पर भी काफी असर पड़ा जिससे हमारे रोज़ के रिश्तों को छोटे/बड़े पर्दे पर जीवंत करती ये पूरी इंडस्ट्री इस महामारी से प्रभावित हुए बिना न रह सकी।

दोस्तों, Bollywood फिल्म इंडस्ट्री लगातार निर्बाध गति से चलती रहे और भारतीयों के जीवन को मनोरंजन के धागे से बांधे रखे, यही मेरी कामना है।

सुख-दुख, अच्छे-बुरे सभी की सीख देती ये फिल्में समाज को सदैव आईना दिखाती रहें बस इसी आकांक्षा के साथ अगले अंक में फिर मिलेंगे...

तब तक के लिए जय हिन्द, जय भारत...