Hindi Writing Blog

सोमवार, 15 अगस्त 2022

भारत का अमृत महोत्सव

 

75th Independance Day

वतन पर मर मिटने की सदाएँ जब भी आएंगी

चमक जाएगा हर चेहरा दिशाएँ गीत गाएँगी

वतन पर मर मिटने की सदाएँ जब भी आएंगी...

आग से खेल जाएगा हर कोई, हटा कर भेद सब सारे  

खनकती चूड़ियों वाले हाथों में भी खड्ग होगी

वतन पर मर मिटने की सदाएँ जब भी आएंगी...

लहरा उठेगा तिरंगा, मिटा जाएंगी दूरियाँ सारी  

राखी बंधे हाथों में भी तब खंजर होगा

वतन पर मर मिटने की सदाएँ जब भी आएंगी...

बड़े-छोटे, तेरे-मेरे, अपने-पराए के हर दर्द को पीछे छोड़ जाएंगी

वतन पर मर मिटने की सदाएँ जब भी आएंगी...

                            स्वरचित रश्मि श्रीवास्तव “कैलाश कीर्ति”

 

जोश जुनून और हर्षोल्लास के मनोभावों को एकता और एकजुटता के बंधन में बांधते भारत राष्ट्र के 75वें स्वतन्त्रता दिवस की आप सभी को बहुत-बहुत बधाई

शनिवार, 2 जुलाई 2022

खुद का वजूद तलाशती नारी

 

Women-Existence

ज़िद थी हमें आसमां को छूके आने की,

पर पलकों पर ख्वाबों को सजाने से भी डरते हैं,

कहीं पर कतर न दे कोई उड़ते परिंदे का,

यही दर्द जमाने से छिपाये फिरते हैं,

रोशनी बिखरकर आएगी एक दिन राहों में हमारी,

बस इसी एक उम्मीद पर,

खुद का वजूद खुद में गुमाए फिरते हैं।

ज़िद थी हमें आसमां को छूके आने की

                        (स्वरचित रश्मि श्रीवास्तव “कैलाशकीर्ति)

राधा ओ राधा!, जरा मुझे एक कप चाय दे दो – मुझे आज ऑफिस जल्दी निकलना है। अभी सुबह के पाँच ही तो बजे हैं, साढ़े चार बजे की अलार्म क्लॉक पर उठी राधा की दिनचर्या हर रोज कुछ ऐसे ही शुरू होती है। पतिदेव की मॉर्निंग टी की फरमाइश, तो ससुर जी के लिए पेपर और चश्मा ढूंढकर देने की, सासू माँ के नहाने का गरम पानी क्योंकि उन्हें सुबह सवेरे नहाँ धोकर राधा-कृष्ण की पूजा जो करनी है साथ ही रिंकू-पिंकी का स्कूल बैग-लांच बॉक्स – सबकुछ किसी सुपर वूमेन  की तरह निपटाती राधा को ठीक नौ बजे स्कूल पहुंचना है, आज स्कूल में प्रिंसिपल मैम के साथ उसकी मीटिंग है जिसमें क्लास टीचर होने के नाते क्लास के तमाम बच्चों की monthly प्रोग्रेस उनसे शेयर करनी है। एक अकेली राधा और उसके समर्पण, प्रेम, त्याग और निस्वार्थ भावनाओं की रसलहरियों से सिंचित होता घर का आँगन और उस घर के आँगन से बाहर निकलकर आशाओं, कुछ कर गुजरने की उसकी कोशिशों तथा खुद के वजूद को इस बदलते समाज के साथ फिट बैठाने की उसकी जिद ने उसे घर की चार-दीवारी से बाहर निकालकर समाज के उस वृहद दायरे में लाकर खड़ा कर दिया है जहां कामकाजी चुनौतियों के साथ संतुलन बनाकर उसे हर पल, हर क्षण एक स्त्री होने के एहसास को जिंदा बनाए रखने के लिए मजबूर कर दिया जाता है।

वर्तमान परिस्थितियों में technology से भरी इस 21वीं सदी में भी इस दुनिया ने स्त्रियों के अस्तित्व और उनकी सकारात्मक ऊर्जा को स्वीकारने में कहीं न कहीं एक लचर रवैया अपना रखा है। जब कभी भी पुरुष संग स्त्री समानता की बात आती है तो ये सब बातें सिर्फ कुछ खाली उँगलियों से निकले शब्दों तक आकर सिमट जाती हैं, जो किताबी बातों के अलावा ज्यादा कुछ नहीं। वरना रोज़मर्रा की जिंदगी में तो आज भी घर के अंदर और बाहर का सामंजस्य बनाए रखने की ज़िम्मेदारी स्त्रियों पर ही है। बने-बनाए करियर को छोड़कर अगर पारिवारिक जिम्मेदारियों को संभालने की बात हो तो वहाँ भी ये समाज दृढ़ होकर स्त्री मंशा से ही हाँ की उम्मीद लगाता है। न जाने क्यों ऐसा है? अच्छे पदों पर कार्य कर रही महिलाओं को भी घर के फैसलों में निर्णायक बने रहने की भूमिका बामुश्किल ही मिल पाती है।

कभी तो नारी मन को एक पल ही लगता है उसने जीवन में सबकुछ हासिल कर लिया, वहीं दूसरे पल उसे इस बात का एहसास भी होता है कि उसका अपना तो कुछ है ही नहीं। कितनी अजीब है न इन सामाजिक रिश्तों की कशमकश? आज के इस आधुनिक समाज ने इतना तो साबित कर दिया है कि स्त्रियों को विधाता ने सृष्टि संतुलन की ऐसी कला दी है जो सफलतापूर्वक वो जीवन के हर मोर्चों पर निभाती है – कभी एक बेटी बनकर तो कभी पत्नी, बहू, और माँ बनकर लेकिन इन सबके बावजूद एक प्रश्न जो आज भी स्त्री समाज के लिए लाख टके का है कि इन सभी सफल मोर्चों पर लड़ते-लड़ते क्या उनका स्वीकरण इस समाज द्वारा उसी प्रकार हो पाया है जैसा पुरुषों का? आखिर क्यों जब त्याग और बलिदान की बात आती है तो सारा समाज मिलकर स्त्री जाति की ओर ही उंगली करता है, पुरुषों की ओर क्यों नहीं? और ताज्जुब तो इस बात का है कि इन उँगलियों में पुरुषों के साथ कुछ उँगलियाँ स्त्रियों की भी हैं? ऐसा क्या है जो नारी आज भी अपना सर्वस्व देने के बाद भी अपने ही वजूद को अपने में ही तलाशने के लिए मजबूर है।

 आशा बस इस बात की है कि नारी और पुरुष के संतुलन का संदेश देती प्रकृति की बातें हमारी रोज़मर्रा की जिंदगी में लागू हों और स्त्रियों को वो मिले जिसकी वो हकदार हैं।

            दोस्तों, ये थी मेरी एक ऐसी रचना जो मेरे परिवेश के इर्द-गिर्द हर दिन घटती है। मैं कुछ कर तो नहीं सकती पर अपनी लेखनी के माध्यम से एक बात जरूर आप से साझा कर सकती हूँ कि आगे बढ़कर स्त्रियों को सम्मान देने की शुरुआत करें ताकि संसार के लिए सकारात्मक उर्जाओं का एक नया दौर आरंभ हो सके। फिर देखिये नारी की उस उड़ान को जिसे वो अपने दर्द के पीछे छिपाकर रखती आई है।

          आज के लिए बस इतना ही अगले अंक में फिर मिलेंगे तब तक के लिए जय हिन्द, जय भारत!!!


रविवार, 8 मई 2022

Happy Mother's Day

 

Mother's Day Image

धरती में है माँ की खुशबू,

अंबर शीश झुकाए है ।

कल्पित छल की ओढ़ चुनरिया,

नदिया जल बरसाए है ।।  

अठखेली करती वसुधा से ममता,

सीख हमें दे जाए है ।

तरु पल्लव की पुष्प मल्लिका,

हर्ष गान जब गाए है॥

प्रकृति सहेजे माँ स्वरूप को,

जब पुष्पों की कोमल पंखुड़ियाँ,

मंद बयार सहलाए है ।

माँ की महिमा इस जग में,

सूरज चाँद भी गाएँ हैं ॥

सूरज की स्वर्णिम आभाएँ,  

जब माँ-आशीष में मिल जाए है।  

चन्द्र-चाँदनी की शीतलता

माँ लोरी संग गाए है ॥

प्रकृति मिलन का यही आईना,

हम सब मातृ रूप में पाएँ हैं

धरती में है माँ की खुशबू...

          स्वरचित रश्मि श्रीवास्तव “कैलाश कीर्ति”

 

प्रस्तुत पंक्तियों में “कल्पित जल की ओढ़ चुनरिया, नदिया जल बरसाए है अर्थात नदी जब पानी के लहरों को लेकर कर पहाड़ों से चलती है तो धरती माँ की गोद में कही उठती है तो कहीं गिरती है, कहीं छुपती है तो कहीं सामने आ जाती है। कल्पनाओं का ये बादल लिए जब वो आगे बढ़ती है तो धरती माँ उस पर अपना सारा स्नेह लुटा देती हैं। प्रकृति का दिया ये संदेश उन सभी संतानों के लिए है जिनकी माँ सारे बंधन से परे होकर अपनी ममता आजीवन अपने बच्चों पर लुटाती हैं फिर चाहे उसमें समर्पण, त्याग, बलिदान, आलोचना और निंदा जैसी अनगिनत मनोभावनाओं का उतार-चढ़ाव भी शामिल क्यूँ न हो...Happy Mother’s Day!!!

 

 

 


रविवार, 10 अप्रैल 2022

रामनवमी की हार्दिक बधाई

Happy Ramnavmi



              नौमी तिथि मधु मास पुनिता...

               भए प्रकट कृपला दीनदयाला कौसल्या हितकारी।

               हरषित महतारी मुनि मन हारी अद्भुत रूप बिचारी॥

               लोचन अभिरामा तनु घनस्यामा निज आयुध भुजचारी।

                भूषन बनमाला नयन बिसाला सोभासिंधु खरारी॥

पृथ्वी वासियों का प्रभु राम से मिलन कराती रामनवमी, प्रभु के आचार – व्यवहार को मानवजाति के निज जीवन में सम्मिलित किए जाने का संदेश देती है साथ ही हमें इस बात के लिए तैयार करती है कि जीवन में कठिनाई चाहे जितनी आए हम सभी को धर्म के पथ पर अडिग होकर चलना है क्योंकि...

एक तरफ मानव खुद एकल चलेगा

अगर चुना अधर्म का साथ।

वही दूजी ओर मिलेगी धर्म पथ पर

प्रभु राम साथ की सौगात...

तो बोलो प्रभु राम की जय

प्रभु राम का साथ सदैव हम सभी के साथ यूं ही बना रहे इसी कामना संग आप सभी को रामनवमी की हार्दिक शुभकामनाएँ...   




 

शुक्रवार, 18 मार्च 2022

होली की हार्दिक शुभकामनाएँ

 

Happy Holi


प्रकृति के दिए रंगों से सजी

इस रंग-रंगीली दुनिया में

असली होली तो तब होगी

जब बहुजन हिताय, बहुजन सुखाय

की सहस्त्रों धाराएँ एक बार फिर

जगत मध्य कदम ताल करेंगी।

जीवन का स्पंदन तब

भय के घेरे से मुक्त बहेगा

जब रंगों की बौछार में

मानव जाति का समावेशन भी

खुलकर प्रकृति संग जीवन को

जी लेने की हुंकार भरेगा

असली होली तो तब होगी...

   स्वरचित रश्मि श्रीवास्तव “कैलाश कीर्ति”

 

आइये इस होली अपने देश संग समग्र संसार में शांति स्थापना और निर्विघ्न जीवन के रंगों की छटा इस धरा पर सदा सर्वदा बिखरते रहने की कामना करते हुए इस रंग महोत्सव को सबके संग मिलकर मनाएँ, आप सभी को सामाजिक सद्भाव और एकता का संदेश देती होली की हार्दिक शुभकामनाएँ!!!


मंगलवार, 8 मार्च 2022

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस

 

Happy Woman's Day



नारी की महत्ता का गुणगान करती इन पंक्तियों के साथ अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की आप सभी को शुभकामनाएँ

 सृष्टि के संयोग से

जब नर संग नारी बनी

चलने लगा ब्रह्मांड तब ये

वसुधा भी पूरित हुई

आकाशगंगा से निकलती

जीवन ज्योति तब कहीं आगे बढ़ी

स्नेह और वात्सल्य का

जब ले समागम

नर संग नारी चली

महक उठा संसार तब ये

हर घर की दहलीज

भी पूरित हुई, सृष्टि के संयोग से... (1)

अश्रुओं के सैलाब को जब

नयनों में रोक रखने

की शक्ति और अधरों पर मुस्कान ले  

जब नारी आगे बढ़ी

संयम और धैर्य का रुख देख

तब राधा और सीता भी

प्रभु कृष्ण और प्रभु राम के

आगे जुड़ी

पूर्ण हुआ दुनिया का स्वप्न

तब ये प्रकृति भी

पूरित हुई, सृष्टि के संयोग से... (2)

 स्वरचित रश्मि श्रीवास्तव “कैलाश कीर्ति”

शनिवार, 26 फ़रवरी 2022

Bollywood पर लगा कोरोना का ग्रहण: हटना है जरूरी

 



Bollwood Vs Corona

दोस्तों, अभी कुछ दिनों पूर्व तक कोरोना के नए variant Omicron ने एक बार फिर से दुनिया में दहशत फैलाने का सिलसिला जारी रखा वहीं दिसंबर 2019 में चीन के वुहान शहर से निकले इस वायरस ने वक्त के साथ लोगों के जीवन को व्यक्तिगत रूप से किस हद् तक प्रभावित किया है इसका अंदाजा हमें अपनी रोज़मर्रा की जिंदगी से भली-भांति पता चल ही रहा है बावजूद इसके कोरोना से हुए नुकसान का राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कितना प्रभाव पड़ा है ये पता लगा पाना नामुमकिन है क्योंकि एक तरफ अगर श्रीलंका, पाकिस्तान, वेनेजुएला जैसे देश आर्थिक दिवालियेपन की ओर अग्रसर हैं वहीं दूसरी ओर दुनिया की बड़े देशों की आर्थिक स्थिति भी कुछ ज्यादा अच्छी नहीं है। कोरोना ने दुनिया के विकास को गति देने वाले ज़्यादातर सेक्टर्स पर अपनी तबाही के निशान छोड़े हैं।

दोस्तों, लोगों को इस महामारी के चलते हुए नुकसान से उबरने में एक लंबा अरसा लगेगा और रही बात अपने देश की तो भारत दुनिया के उन देशों में शामिल है जहाँ कोरोना की मार सबसे ज्यादा पड़ी है। कोरोना की महामारी ने हमें न केवल शारीरिक रूप से पीड़ा पहुंचाई है बल्कि मानसिक स्तर पर भी काफी आघात दिया है जिसका ताजातरीन उदाहरण भारतीयों के मानसिक सेहत का ख्याल रखने वाले Bollywood पर भी कोरोना के असर से पूर्णतया परिलक्षित होता है क्योंकि ये Bollywood ही तो है जिससे निकलने वाले किरदार हमारे समाज के लोगों को जीवन जीने की राह दिखाते हैं इतना ही नहीं हमारी जिंदगी में शामिल जीवन के प्रत्येक पहलू को छूते रंग-बिरंगे अंदाज से खुशियों को सराबोर करा जाते हैं फिर चाहे वो जज्बा देशभक्ति से जुड़ा हो या फिर शादी-ब्याह के मौकों पर झमाझम बजते संगीत और नृत्यों का सिलसिला हो। हमारे जीवन का अभिन्न हिस्सा बनीं Bollywood की अनगिनत फिल्में और इनसे जुड़े रिश्ते-नातों को कोरोना की इस महामारी ने कहीं निगल सा लिया है वरना तो नई-नई फिल्मों के गाने आते ही नुक्कड़ और चौराहों पर स्पीकर के माध्यम से बजते गाने हम सभी के जीवन में उल्लास और हर्ष की जो बयार लेकर आते हैं उन्हें हम कभी अकेले में तो कभी सबके साथ मिलकर गुनगुनाते हैं।

दोस्तों, कोरोना पूर्व 2019 का शानदार साल हमारी मुंबइया फिल्मों के लिए भी बेहतरीन रहा जब बॉक्स ऑफिस पर प्रदर्शित की गई फिल्मों में से कुल 17 फिल्में 100 करोड़ रुपये की कमाई करने वाले क्लब का हिस्सा बनीं। इन फिल्मों में तो ऋतिक रोशन अभिनीत फिल्म War ने 318 करोड़, ऊरी, कबीरसिंह, हाउसफुल 4, मिशन मंगल, दबंग 3 और भारत जैसी फिल्मों ने 200 करोड़ कमाएं, लेकिन दिसंबर 2019 में कोरोना के शुरू होने के बाद 2020 में केवल अजय देवगन अभिनीत तानाजी ही 280 करोड़ का बिजनेस कर पाई और ये सिलसिला तब रुक गया जब कोरोना महामारी के तांडव के चलते सुरक्षा कारणों से अधिकतर फिल्मों की सूटिंग बंद हो गई। थिएटर/सिनेमाहाल बंद होने से अँग्रेजी मीडियम और बागी 3 जैसी फिल्मों पर खासा असर पड़ा। 

दोस्तों, Bollywood की फिल्में थियेटर में न हों और उनके गानें आम लोगों की जिंदगी का हिस्सा ना बनें तो कहीं न कहीं सबकुछ सूना सा ही लगता है क्योंकि हम मानें या न मानें ये गानें, ये फिल्में हमें मनोरंजन के साथ मानसिक खुशी देने का एक अच्छा जरिया हैं, तभी तो कोरोना के बीच आई दक्षिण भारतीय फिल्म “पुष्पा” के हिन्दी वर्जन के गाने और फिल्म ने पूरे उत्तर भारत में धूम मचा दी। अल्लू अर्जुन अभिनीत इस फिल्म के गाने “तेरी झलक अशरफी और डायलॉग “मैं झुकूँगा नहीं” ने सभी पर अपना अच्छा खासा असर छोड़ा। तभी तो इंस्टाग्राम और यूट्यूब रील से लेकर अलग-अलग प्लेटफार्मों पर अल्लू अर्जुन के डांस की कापी करते लोग बड़े आसानी से आपको दिखाई दे जाएंगे।

Bollywood Image
दोस्तों, ये तो रहीं थोड़ी खुशमिजाजी की बातें लेकिन इन सबसे कहीं अधिक चिंताजनक रही Bollywood industry से जुड़े कुछ कलाकारों की स्थिति का डवांडोल होना और उनके जीवन पर असर डालने वाले घटनाक्रमों का हम सभी के सामने खुलकर आना। इन कलाकारों के प्रशंसक भी इन सबसे से कहीं न कहीं खुद को आहत पाते हैं। कोरोना काल में सुरक्षा कदमों के चलते फिल्मों के साथ टीवी चैनल कार्यक्रमों की सूटिंग पर भी काफी असर पड़ा जिससे हमारे रोज़ के रिश्तों को छोटे/बड़े पर्दे पर जीवंत करती ये पूरी इंडस्ट्री इस महामारी से प्रभावित हुए बिना न रह सकी।

दोस्तों, Bollywood फिल्म इंडस्ट्री लगातार निर्बाध गति से चलती रहे और भारतीयों के जीवन को मनोरंजन के धागे से बांधे रखे, यही मेरी कामना है।

सुख-दुख, अच्छे-बुरे सभी की सीख देती ये फिल्में समाज को सदैव आईना दिखाती रहें बस इसी आकांक्षा के साथ अगले अंक में फिर मिलेंगे...

तब तक के लिए जय हिन्द, जय भारत...



बुधवार, 26 जनवरी 2022

गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ

Republic Day

सिसकियों और खामोशियों के पिंजरे में

सिमटा था कभी देश मेरा

पर सन् सैतालिस की उस नई सुबह

जब सूरज ने अपनी अलसाई किरणों को

धरती पर भेजा

तो रात की मद्धिम होती चाँदनी ने

मेरे भारत के आजादी की कहानी  

उसे भी कह सुनाई ।।1।।

परिंदों की चहचहाहट ने भी

मेरे भारत की आजादी की  

गाथा गगन की अनंत परिधि में

घूम-घूमकर खूब सुनाई

धीरे-धीरे बात बढ़ी

तो विधि-विधान की चर्चा आई

पेश हुआ फिर संविधान मसौदा

मेरे भारत की भूमि पर

विविध बोलियाँ, भाषाओं और धर्मों से

सजे देश को संप्रभु बनाने

हर्षित करती 26 जनवरी आई

आया गणतंत्र मेरे देश में

भारत ने संप्रभुता पाई ।।2।।

सिसकियों और खामोशियों के पिंजरे में...

                  स्वरचित रश्मि श्रीवास्तव “कैलाश कीर्ति”

 आप सभी को गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ

 

शनिवार, 1 जनवरी 2022

नववर्ष 2022 की हार्दिक शुभकामनाएँ

 

नववर्ष 2022

कभी खुशियों ने राहों में,

छलकाया था हर्ष |

तो कभी गम से,

छिला देश का सीना था ||

जैसे-तैसे करके गुजरा,

सन् 2021 का बारहवों महीना था |

फिर आई नववर्ष 2022 की अनुपम बेला,

मन में उम्मीदों की कलियाँ मुस्काईं ||

ऐसा हो बस वैसा हो,

इस सोच ने फिर से ली है अंगड़ाई |

आशाओं की मांग यही है,

आसान बनें बस राहें सबकी ||

रोग-व्याध भी पास न आए,

सरहद पर बैठे रक्षक भी सकुशल अपने घर को आएँ |

टनटन बजती स्कूल की घंटी |

अब कभी भी रुकने न पाए  ||

ऊपर-नीचे होता जीवन,

लौट कर अब पटरी को आए |

या यूं कह दूँ जगमगाते दीयों से रोशन,

दुनिया का हर इक हिस्सा हो जाए ||  

ऐसी मधुरिम आशाओं संग,

चलो पुनः नववर्ष मनाएँ... चलो पुनः नववर्ष मनाएँ...

           स्वरचित रश्मि श्रीवास्तव “कैलाश कीर्ति”

 

आप सभी को नववर्ष 2022 की हार्दिक शुभकामनाएँ....


सोमवार, 20 दिसंबर 2021

लोकतन्त्र की ओर बढ़ाया दुनिया ने एक और कदम

A step towards Democracy

दोस्तों, ये समग्र धरती जिसकी भूमि को बहुत सारे देश न केवल मिलकर साझा करते हैं बल्कि एक दूसरे से बहुत कुछ सीखकर आने वाले भविष्य के लिए फलदायी नीतियों का निर्माण कर पाने में खुद को सक्षम भी बनाते हैं ताकि वो अपनी राष्ट्र सीमा में रह रहे लोगों के जीवन को सही आकार दे सकें।

दोस्तों, जैसा कि हम सब जानते हैं कि यदि शासन और सत्ता की बात की जाए तो प्राचीनकाल से ही इसका स्वरूप समय, काल और परिस्थिति के अनुसार ही तय होता रहा है, कभी राजतंत्रात्मक तो कभी तानाशाही। लेकिन इस तरह के शासन से मिले परिणामों ने दुनिया को हमेशा यही सीख दी कि शासन और सत्ता से यदि सर्वसाधारण यानि आमजन की भागीदारी दूर रहेगी तो समाज में अधिकारों की सुरक्षा और असमानता की भावना चरम पर होगी। ऐसे में दुनिया ने शासन के जिस स्वरूप को बढ़ते समय के साथ मंजूरी दी वो है लोकतन्त्र, जिसमें जनता का शासन, जनता के लिए और जनता के द्वारा होता है - अब्राहम लिंकन; और दुनिया ने अभी तक इस शासन व्यववस्था से जो नतीजे देखे हैं उसमें सर्वसाधारण की खुशहाली और तरक्की ज़्यादातर दिखाई देती है, पर ऐसा नहीं है कि इसकी कुछ शर्तें न हों- लोकतन्त्र की भी अपनी कुछ शर्तें हैं; जैसा कि 26वें अमेरिकी राष्ट्रपति थियोडोर रूज़वेल्ट ने कहा था कि महान लोकतन्त्र को प्रगतिशील होना चाहिए अन्यथा जल्द ही ये महान नहीं रह जाएगा।

दोस्तों, किसी भी लोकतन्त्र का प्रगतिशील होना उसे लंबे समय तक उसके मूल्यों से जोड़े रखता है और शायद यही वजह है कि प्राचीन भारत की जनपदीय गणतंत्रात्मक व्यवस्था और योरोप के कुछ हिस्सों से चलकर आई लोकतंत्रात्मक व्यवस्था दुनियाभर के देशों को आकर्षित करती आई है और शायद यही एक बड़ा कारण भी है कि दुनिया के बड़े-बड़े देश जैसे अमेरिका, ब्राज़ील, भारत, ब्रिटेन, आदि ने लोकतंत्र को ही तरजीह दी है और वर्तमान में अब इस कड़ी में एक और नया नाम आ जुड़ा है, लगभग 400 वर्षों तक ब्रिटिश उपनिवेश का हिस्सा रहे बारबोडस का, जो पहली बार सन् 1625 में ब्रिटिश उपनिवेश का हिस्सा बना और जिसके राष्ट्रप्रमुख पद पर अभी तक ब्रिटिश महारानी एलिजाबेथ-II आसीन थीं। लेकिन दक्षिण-पूर्वी कैरिबियन सागर में स्थित इस छोटे से द्वीप जिसकी पड़ोसी सीमाएं उत्तर में सेंट लूसिया, पश्चिम में सेंट विनसेट और ग्रेनेडाइन्स तथा दक्षिण में त्रिनिदाद एवं टोबैको से जुड़ी है और जिसने खुद को 72 वर्षीय राष्ट्रपति डेम सांड्रा प्रुनेला मेसन के अगुवाई में खुद को दुनिया का नया नवेला लोकतन्त्र घोषित कर लिया। मशहूर पॉप सिंगर रियाना को अपना नेशनल हीरो स्वीकारने वाले इस देश ने खुद को प्रिंस चार्ल्स के सामने ही गुलामी की बेड़ियों को तोड़कर बाहर आने और शासन व्यवस्था के लोकतंत्रात्मक स्वरूप को स्वीकारने का संदेश बारबोडस की जमीन से दुनिया को दिया।

बारबोडस द्वारा लोकतंत्र का ये जश्न हमें हमेशा सन् 1947 में मिली आजादी और बाबा भीमराव अंबेडकर जी द्वारा 1950 में दिये गए संवैधानिक उपहार लोकतंत्र के उन मूल्यों की याद दिलाता है जहां बहुजन सुखाय और बहुजन हिताय की बात सत्य सिद्ध होती है, इसलिए मित्रों हम सभी को लोकतंत्र की गरिमा को अनवरत स्वीकारते हुए अपने मतदान के अधिकार का सही और उचित इस्तेमाल सदैव करते रहना चाहिए क्योंकि यही वो अधिकार है जिससे हमें अपने देश का भविष्य चुनने की ताकत मिलती है। लोकतंत्रात्मक शासन व्यवस्था सम्पूर्ण दुनिया में निरंतरता के साथ आगे बढ़ती रहे इसी आकांक्षा के साथ आज के लिए बस इतना ही, अगले अंक में फिर मिलेंगे।

तब तक के लिए जय हिन्द, जय भारत। 

 

गुरुवार, 4 नवंबर 2021

दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएँ

 

Happy Deepawali


कार्तिक मास की स्वर्णिम बेला

पुनः द्वार पर आयी है,

दीपावली पर प्रभु राम सिया

की अयोध्या वापसी

संग सीख बहुत कुछ लायी है ।

कहने को हो जब घनघोर अंधेरा

जीवन में,

तब अविचल होकर कंटक

भरे पथों पर कैसे चले वो

सहजता से ।

प्रभु राम का दिया यहीं प्रण

अब हम सबको दोहराना है,

पुनः द्वार पर आई इस दीपावली को

जगमगाती दीयों की रोशनी,

घर-द्वार पर सजी वंदन-वार की

हिलती-डुलती लहरियों,  

खिड़कियों के पीछे से झाकती

झालरों की टिमटिमाहट,

अधरों पर बिखरी मुस्कान से

जीवन से ही नहीं

इस समग्र संसार से,

तमस के हर एक प्रकार को

दूर भगाना है ।

बस जीवन में अब यही

प्रभु राम का दिया प्रण

दोहराना है...

    स्वरचित रश्मि श्रीवास्तव “कैलाश कीर्ति”