Hindi Writing Blog

सोमवार, 30 मार्च 2020

COVID-19 (SARS-CoV-2): अब बस ऐसा ही हो...



अयम निज: परो वेति गणना लघु चेत्र साम् |
उदार चरितानाम तू वसुधैव कुटुंबकम् ||

भारतीय संसद के प्रवेश कक्ष में अंकित महोपनिषद अध्याय 4 के श्लोक संख्या 71 में लिखा गया यह श्लोक मात्र श्लोक भर नहीं बल्कि ये हम भारतीयों की वो सोच है जिसका पालन हम भारतीय अपने जीवन के हर आचरण में पूरी श्रद्धा के साथ करते हैं और कामना करते हैं कि

ॐ सर्वे भवन्तु सुखिन:
सर्वे संतु निरामया: |
सर्वे भद्राणि पश्यंतु
मा कश्चिद्दु:खभाग्मवत् |
ऊँ शांति: शांति: शांति: ||
अर्थात,
सभी सुखी होवें, सभी रोग मुक्त रहें, सभी मंगलमय घटनाओं के साक्षी बनें और किसी को दुख का भागी ना बनना पड़े|
लेकिन दोस्तों, जैसा कि हम सब जानते हैं मौजूदा हालात में हमारी इन भावनाओं को जैसे ग्रहण लग गया है और ग्रहण का कारण बनी है COVID-19 नाम के virus से फैली ये वैश्विक महामारी जिसने धीरे-धीरे कर पूरी दुनियाँ को अपनी जद में ले लिया है| दुनियाँ भर की मानव जाति आज खतरे में है और विश्व स्तर पर इस आपदा से निपटने के प्रयास भी किए जा रहे हैं, लेकिन कोई सटीक Vaccine या टीके की अनुपलब्धता और एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में transfer होने के गुण के चलते इस महामारी ने जहां पूरी दुनियाँ में लगभग 7,01,525 से ज्यादा लोगों को संक्रमित किया है वहीं लगभग 33174 लोगों को मौत की नींद सुला दी है|
ऐसे में हम सभी का ये दायित्व बन जाता है कि इस जानलेवा बीमारी की जद में ना ही हम खुद आएँ और ना ही दूसरों को आने दें और अलग-अलग देशों में सरकार और system द्वारा जारी की गयी advisory का पालन करें ताकि इस virus के आतंक से पूरी दुनियाँ मुक्त हो सकें|
दोस्तों, ये तो थी आज की स्थिति लेकिन क्या आज जैसे जो हालात पूरी दुनियाँ में बनें हैं उसे बदला जा सकता था? तो मेरी राय में इसका बिल्कुल सीधा सा उत्तर है—जी हाँ| जब चीन के Wuhan शहर में इस virus ने अपना असर दिखाना शुरू किया और देखते ही देखते पूरे शहर को घरों में कैद हो जाने के लिए मजबूर कर दिया तो ठीक उसी वक्त अगर पूरी मानव जाति और दुनियाँ के नक्शे में अंकित देशों ने धैर्य और संयम से काम लिया होता और अपने-अपने देश की अंतराष्ट्रीय सीमाओं को कुछ समय के लिए सील कर लिया होता तो शायद आज हालात कुछ और होते क्योंकि चीन ने जब 6 जनवरी को इस बीमारी के बारे में पूरी दुनियाँ को बताया तब से लगभग 2 महीने के कम समय में ही उसने इस बीमारी पर जीत हांसिल कर ली| मेरे लेख लिखे जाने तक चीन इस बीमारी से बाहर आ चुका है, वहाँ जन-जीवन सामान्य हो चुका है लेकिन बाकी दुनियाँ पर संकट बना हुआ है| ऐसे में हमारी तत्परता और wait and watch की नीति ने शायद इस बीमारी को पूरी दुनियाँ तक फैलने से रोकने में अहम भूमिका निभाई होती, बावजूद इसके आज भी जब दुनियाँ भर की सरकारें और system हम सभी से हाथ जोड़कर ये appeal कर रहे हैं कि इस virus के खिलाफ लड़ी जाने वाली लड़ाई में हम stay home, stay safe के formula को अपनाकर इस चुनौती से लड़ने में उनका साथ दें तो भी हम में से कुछ लोग आज भी वो तत्परता दिखाते नजर नहीं आ रहे हैं जिसे शुरुआती दौर में ना दिखाने की कीमत हम इतना कुछ गवांकर आज चुका रहे हैं|

इसलिए दोस्तों, आप सब से मेरी यही appeal है कि अभी भी वक्त है आगे बढ़कर system द्वारा जारी advisory का सटीक पालन करें और अपनी इस प्यारी सी धरती को इस deadly virus के चंगुल से मुक्त कराने में अपने सहयोगात्मक भूमिका निभाएँ ताकि हमारी धरती फिर से मुस्कराए (😊), तो आइये हम सब मिलकर एक बार फिर से बस यही कामना करें “सर्वे भवन्तु सुखिन: सर्वेसंतु निरामया:....”

मंगलवार, 10 मार्च 2020

होली की शुभकामनाएँ

Happy Holi


होली पर अनमोल वचन लें, जीवन को अब तोल-मोल लें,
रंगों की भरी पिचकारी में, प्रेम-सौहार्द का रंग भी घोल लें,
दुश्मन आँख गड़ाए बैठा, सीमाओं पर देश की,
घर के अंदर खेल रहे हम, होली अपनों के खून की,
कैसी कटुता भरी पड़ी है, आज हमारे सीनों में,
भूल गए क्यों इतनी जल्दी, आजादी के छालों को,
नासूर बन गए जाति-धर्म का, दहन-होलिका हो जाए,
बहे राष्ट्र में प्रेम की गंगा, उन्नति भी खूब लहराए,
फूले-फले भारत माँ का आँचल, रंग तिरंगा चढ़ जाए,
होली पर अनमोल वचन लें...
             स्वरचित रश्मि श्रीवास्तव (कैलाश कीर्ति)

आप सभी को मेरी तरफ से होली की हार्दिक शुभकामनाएँ...

रविवार, 8 मार्च 2020

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ

 
International Women's Day


अखिल विश्व की नारी शक्ति को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ

दोस्तों, भारत सहित दुनियाँ भर के 68 देशों में लोगों को अपना शिकार बना रहे Corona Virus के साथ देश कि  राजधानी दिल्ली में हुई हिंसा ने भी मानव धन क्षति के चलते अन्तर्मन को काफी व्यथित कर दिया है| ऐसे में स्वयं एक महिला होने के नाते मेरा दुनियाँ के आधी आबादी को यही संदेश है कि जिस तरह मुश्किल घड़ी में वो पुरुषों के साथ खड़ी होकर सदा से इस सृष्टि चक्र को पूर्ण करने वाली परंपरा हेतु अपना अमूल्य योगदान देने में अपनी महती भूमिका निभाती आई हैं वो आगे भी इस क्रम को जारी रखें क्योंकि निर्भीकता, निडरता और ममता की प्रतिमूर्ति नारियां ही विधाता की बनाई वो कृति हैं जिन्होने अपने हौसलों के उड़ान से सदैव इस दुनियाँ को नयी दिशा दी है|
 

सोमवार, 24 फ़रवरी 2020

साइबर क्राइम: आधुनिक तकनीकी युग की नयी चुनौती

Cyber Crime

दोस्तों, आज एक तरफ जहां चीन सहित दुनियाँ भर के 28 देश कोरोना वाइरस के कहर से कुदरत प्रदत्त इंसानी शरीर को बचाने की जंग लड़ रहे हैं वहीं दूसरी ओर पूरी दुनियाँ को एक-दूसरे से जोड़कर रखने वाली आधुनिक तकनीकों से लैस मोबाइल और कम्यूटर की साइबर दुनियाँ भी हर रोज नए-नए खतरों का सामना कर रही है| आलम ये है कि इस दुनियाँ से जुड़े अपराध लोगों को इस हद तक अपना शिकार बना रहे हैं कि लोग ये समझ ही नहीं पा रहे हैं कि इंसानी तरक्की में मददगार बनी इन चीजों का इस्तेमाल वो करें या ना करें| दोस्तों, जैसा कि आए दिन हमें समाचार पत्रों और सोशल मीडिया के जरिये ये खबरें पढ़ने को मिल ही जाती हैं कि लोग कितनी तेजी से online धोखाधड़ी का शिकार हो रहे हैं और इतना ही नहीं इसके चलते लोगों को जिन दूसरी और समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है उसके अनुसार कहीं लोगों के personal information से जुड़े डाटा चोरी हो रहे हैं तो कहीं लोगों की मेहनत से जमा किए गए पैसे उनके ही bank account से एक झटके में ही गायब कर दिये जा रहे हैं|

दोस्तों, ये घटनाएँ इस तकनीकी युग से जुड़ी दुनियाँ का वो काला सच है जिसे हम अपने modern technique से लैस इस era में मात्र एक click से पूरी दुनियाँ को मुट्ठी में कर लेने की सोच के बदले face कर रहे हैं और हमारी इसी सोच को अंजाम देते-देते इस तकनीक में अपराधियों ने किस हद तक जगह बना ली है उसका अंदाजा तो हमें International Judicial Conference में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा कही इस बात से ही लगा सकते हैं जिसमें उन्होने डाटा सुरक्षा और साइबर क्राइम को न्यायपालिका के लिए नई चुनौती बताया|
दोस्तों, प्रधानमंत्री जी की ये चिंता जायज भी है क्योंकि साइबर क्राइम के आंकड़ों में दिन पर दिन हो रही बढ़ोत्तरी भी यही संकेत दे रही है हालांकि इस तरह के क्राइम के लिए artificial intelligence की मदद काफी कारगर है लेकिन चिंताजनक बात ये है कि जब सन् 2011 national crime records bureau ने इस तरह के अपराधों में 85% वृद्धि के साथ यह बताया कि इसमें शामिल अपराधियों की आयु 18 से 30 वर्ष के बीच की है यानि इस तरह के अपराधों को करने वाले अधिकतर युवा हैं जो hacking, web hijacking, cyber stocking, cyber bullying, service attack, software attack, virus attack, pornography, बाल यौन शोषण, software piracy, salami attack, phishing जैसे तरीकों का इस्तेमाल कर इस तरह के अपराधों को न केवल अंजाम दे रहे हैं बल्कि समाज में युवाओं की भूमिका को भी सोचनीय बना रहे हैं|
दोस्तों, जैसा की हम सब जानते हैं कि आज हम वैश्वीकरण के जिस युग में जी रहे हैं उसमें हमें दुनियाँ के हर हिस्से से जोड़े रखने में internet ने कितनी अहम भूमिका निभाई है और तो और आज internet के बदौलत ही हम सभी के लिए सामाजिक नेटवर्किंग, ऑनलाइन purchasing, जानकारी का आदान-प्रदान, गेमिंग, ऑनलाइन एजुकेशन, ऑनलाइन जॉब जैसी अनेकों सुविधाएं घर बैठे आसानी से हासिल हो रही है जिसके बारे में आज से पहले हम सिर्फ कल्पना कर सकते थे| आज वो हमारी पहुँच में आसानी से आ गयी है लेकिन हमारी ये सुविधाएं अब कुछ लोगों के निशाने पर आ चुकी हैं और जिसकी भयावहता इस स्तर की है जो आम लोगों के साथ देश की सरकारी और गैर सरकारी संस्थानों तक को अपना निशाना बना रही है बावजूद इसके दुनियाँ भर के अनुमानत: 4.33 billion active internet users जहां इस technology का इस्तेमाल कर रहें वहीं world population के लगभग 57% लोग internet access रखते हैं जो आकड़ों के लिहाज से दुनियाँ के एक बड़े हिस्से को जोड़े रखता है लेकिन इनमें से ज़्यादातर लोग आज भी साइबर क्राइम की दुनियाँ के खतरों से अंजान होते हैं| ऐसे में इससे जुडने के साथ ही ये जरूरी हो चला है कि समय-समय पर इस दुनियाँ को Commwarrior-A, Welchia, Blaster,  Slammer, NIMDA, Code Red, ILOVEYOU, The Morris Worm, Elk Cloner, Creeper जैसे viruses का सहारा लेकर अपराधियों द्वारा नए-नए तरीकों से दुनियाँ को दहलाने की कोशिश करने वाले अपराधियों और उनके द्वारा किए जाने वाले अपराधों से सतर्क रहें साथ  ही इससे निपटने हेतु हमारी जागरूकता इस तथ्य में निहित है कि इस आपराधिक दुनियाँ से निपटने के लिए हम कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करें और इस तकनीक से जुड़ी सुविधाओं का इस्तेमाल करते वक्त सावधानी बरतें ताकि साइबर क्राइम से जुड़े इन अपराधों पर लगाम लगाई जा सके|
दोस्तों, आने वाले भविष्य के लिए चुनौती बन चुके जन जागरूकता से जुड़े इस विषय पर ये थी मेरी सोच के साथ साझा की गयी जानकारियाँ| इस समस्या का हल भी मानवीय सभ्यता अवश्य ढूंढ लेगी| इसी कामना के साथ जय हिन्द जय भारत...

सोमवार, 3 फ़रवरी 2020

खेत-खलिहान से जुड़ी भारतीय उन्नति: एक सार्थक सोच


दोस्तों, जहां एक ओर पूरी दुनियाँ में Corona virus के चलते global health emergency declare की गयी है वहीं दूसरी ओर आज भारतीय संसद, आजाद भारत से जुड़े एक और बजट का गवाह बनी जिसमें वर्तमान सरकार ने कृषि क्षेत्र से जुड़ी कई नई भावी योजनाओं से देश को अवगत कराया| दोस्तों, 130 करोड़ आबादी वाले इस विशाल देश में यूं तो प्रतिवर्ष भारतीय नीति निर्माताओं द्वारा किसानों और खेत-खलिहानों की खुशी के लिए अनेकों योजनाएँ बनाई जाती हैं लेकिन क्या वो पर्याप्त हैं? ये सवाल आज हर किसी के मन में इसलिए कौंध रहा है क्योंकि मौजूदा दौर में जब भारत सहित पूरी दुनियाँ की अर्थव्यवस्थाओं में मंदी के कयास लगाए जा रहे हैं ऐसे में कभी अतीत के आर्थिक superpower रहे भारत की ओर पूरी दुनियाँ की निगाहें होना लाजिमी है क्योंकि पूरे विश्व के लिए ये मायने रखता है कि भारत कैसे और किस प्रकार भारतीय economy को आने वाले सालों में 5 trillion dollar economy बनाने के लक्ष्य को पूरा कर सकेगा| दोस्तों, विशेषज्ञों की अगर मानें तो इस उन्नति का रास्ता जाता है भारतीय खेत-खलिहानों से होकर दूसरे शब्दों में कहें तो हमारे जीवन को जीने के लिए सबसे महत्वपूर्ण जरूरतों में से एक अन्न उपजाने वाले किसानों और उनके खेत-खलिहानों का विकास कर ही सरकार हमारे देश को तरक्की की राह पर पुनः ले जा सकती है|
मैं ये नहीं कहती कि सरकार के प्रयासों में कोई कमी होती है पर सरकार द्वारा लागू अनेकों योजनाओं के बावजूद storage और transportation के समस्याओं के चलते किसानों को direct इन सुविधाओं का लाभ अभी भी नहीं मिल पा रहा और तो और आम आदमी की महंगी होती खाने की थाली का सटीक मूल्य भी उन्हें नहीं मिल पाता ऐसे में कृषि कार्यों से दूरी बनाये रखना भारतीय युवाओं की पहचान बन चुकी है जिसे हर हाल में रोकना ही होगा| दोस्तों, जैसा कि हम सब जानते हैं कि बीते वर्ष का economic sciences का Nobel prize share करने वाले good economics for hard times के लेखक और भारतीय मूल के economist अभिजीत बनर्जी को मिला था और उनका भी यही मानना है कि भारत की तरक्की का रास्ता भारत के खेतों से ही होकर गुजरता है और हो भी क्यों न हम भारतीय आज इतनी समस्याओं से घिरे होने के बावजूद दुनियाँ के सबसे बड़े कृषि प्रधान राष्ट्र का दर्जा जो रखते हैं यही नहीं दोस्तों, मनुष्य को जीवन देती अन्न उपजाने की परंपरा की शुरुआत कर उसे इस विकसित स्वरूप में लाने वाले इस विशाल देश में खेती आज से लगभग 5 हजार वर्ष पूर्व सिंधु सभ्यता से ही प्रारम्भ हो चुकी है जो निरंतर विकास के दौर से गुजरते हुए इस रूप में हमारे सामने मौजूद है| ऐसे में कृषिक्षेत्र को अगर हम  भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ कहें तो गलत न होगा और शायद यही कारण भी रहा है कि भारत पर निरंतर हुए विदेशी हमलों के बावजूद भारत आज भी इतना सम्पन्न है| दोस्तों, हमारे देश में खेल-खलिहानों की खुशिहाली लोगों के जीवन को किस हद तक प्रभावित करती है कि हमारे तीज त्योहारों से लेकर हमारे शास्त्रो जैसे ऋग्वेद, अथर्ववेद, गृह सूत्र, श्रोत सूत्र और पाणिनी की अष्टाध्यायी तक में इनका वर्णन प्राप्त होता है और रही रोज़मर्रा के जीवन में इसके शामिल होने की बात तो इसका सीधा उदाहरण है पद्मश्री से सम्मानित बीजमाता राहीबाई पोपरे, जिन्होने मात्र अपने जीवन के अनुभवों से कृषि जगत को अनुपम भेंट सौपी है जो ये prove करने के लिए काफी है कि भारतीय जनमानस के बीच कृषि क्षेत्र से जुड़ी परम्पराओं की जड़ें कितनी गहरी हैं बस जरूरत है तो इन्हें सींच कर पुष्पित और पल्लवित करने की ताकि भारत की उन्नति का मार्ग प्रशस्त हो सके साथ ही भारतीय खेत-खलिहानों से सदैव राष्ट्र तरक्की की गाथा आने वाले भविष्य में लिखी जाती रहे इसी आशा में जय जवान जय किसान जय विज्ञान...

गुरुवार, 30 जनवरी 2020

बसंत पंचमी की हार्दिक शुभकामनाएँ

बसंत पंचमी


ओढ़ चुनरिया बसंत ऋतु की, धरती ने फिर किया शृंगार |
जीवन बरसाती इस ऋतु का, भंवरे भी करते हैं प्रसार ||
नए कपोलों के झुरमुट से, कू-कू करती कोयलिया |
भी बरसाए राग-बसंत की फुहार  ||
तरुण आम्र की मंजरियों से, सुवासित होकर |
बहती मंद-मंद बसंत बयार||
कमल कामिनी सी काया ले, खेतों में लहराती सरसों |
जीवंत रागनियों की तानों पर, गाये गीत बसंत के बारंबार ||
रंग-बिरंगे फूलों के झूलों में फिर
हे सखी! आए ऋतुराज बसंत बहार, आए ऋतुराज बसंत बहार....
                               स्वरचित रश्मि श्रीवास्तव (कैलाश कीर्ति)

माँ शारदा के प्राकट्योत्सव और बसंत पंचमी के पावन पर्व की आप सब को मेरी तरफ से ढेरों शुभकामनाएँ

रविवार, 26 जनवरी 2020

भारतीय गणतन्त्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ

भारतीय गणतन्त्र दिवस पर कविता


समय चक्र की अविरल धारा, करती है गुणगान देश का |
कहती है हर पल वो हमसे, शीश झुकाकर कर लो वंदन ||
उन वीरों का, जो हैं अभिमान देश का |
कालजयी है उनकी भी गाथा, जिन्होंने रचा है विधान देश का ||
शत् शत् नमन है उनको भी, जो हैं स्वाभिमान देश का |
जब जनता का शासन, जनता के लिए, जनता के ही द्वारा है ||
तो फिर कैसा ये द्वंद-सा चल रहा, देश के कोने-कोने में |
भटक रही क्यों युवा शक्ति, जो प्राण वायु है भारत की ||
सिमट गयी क्यों एका अपनी, जिसपर गर्व था भारत को |
अभी वक्त है देर न हुई, राष्ट्र को स्व-राष्ट्र बनाने में ||
राष्ट्र हित को सर्वोपरि कर, चलो बनाएँ भारत अपना |
सहज होंगी राहें अपनी, पूरा होगा हर एक सपना ||
समय चक्र की अविरल धारा, करती है गुणगान देश का....
                              स्वरचित रश्मि श्रीवास्तव (कैलाश कीर्ति)

मेरी तरफ से आप सभी को भारतीय गणतन्त्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ...


रविवार, 5 जनवरी 2020

भारतीयों का अपने अतीत की ओर लौटना जरूरी क्यों?

World Events


सच्चाई तो ये है यारों कि गुमराह हैं हम,
तलाश-ए-सुकूं से बेपरवाह हैं हम |
कौन कहता है जिंदगी अमन-ओ-चैन से जी नहीं जाती,
बस भटके हुए को कोई राह-ए-मंजिल तो दिखा दो यारों ||
              स्वरचित रश्मि श्रीवास्तव (कैलाश कीर्ति)

दोस्तों, सन् 2020 के नए वर्ष में प्रवेश का आगाज हो चुका है, दुनियाँ के इतिहास में सन् 2019 का पन्ना अपनी अमिट यादों को समेट कर जा चुका है और सामने खड़ा सन् 2020 अपने कोरे पन्नों पर इतिहास लिखने को बेसब्र है| वर्तमान समय में चारो ओर छाई अस्थिरता हर बार हमें सोचने को विवश किए जा रही है कि शायद आने वाले कल से बेहतर तो बीता हुआ कल था| दोस्तों, अभी कल ही वैश्विक स्तर पर छाई 2 सुर्खियों ने पूरी दुनियाँ का ध्यान अपनी ओर खींच लिया जिसमें पहला था अमेरिका (US) और ईरान (IRAN) के बीच कई सालों से चली आ रही जुबानी जंग का हमलों में परिवर्तित हो जाना और दूसरा घटनाक्रम था ननकानासाहिब में विरोध|
दोस्तों, ऐसे ही और कई मन को विचलित कर देने वाले घटनाक्रम आजकल हमारे देश सहित पूरी दुनियाँ में चल रहे हैं, आखिर ये सब क्यों हो रहा है? क्यों बढ़ते सुविधा सम्पन्न संसाधनों के बीच संघर्षों की ऐसी पटकथाएँ लिखी जा रही जिनको भेद पाना दिन पर दिन मुश्किल होता जा रहा है| ये आए दिन होने वाली घटनाएँ न केवल आज पूरी दुनिया को गुमराह कर देने वाले हालात में छोड़े जा रही हैं बल्कि ये पूछने पर भी मजबूर कर रही हैं कि आखिर कल तक जो देश फल-फूल रहे होते हैं उनके अचानक खात्में तक की जरूरत क्यों आन पड़ रही है? क्यों कोई भी नेतृत्व  जन-जन के बीच बढ़ रहे आक्रोश को संभाल नहीं पा रहा? दोस्तों, क्या आपको नहीं लगता कि समग्र विश्व को एक वैचारिक चिंतन की सख्त आवश्यकता आन पड़ी है ताकि जो काले अध्याय विश्व इतिहास की 20th Century में World War I और World War II के रूप में लिखे गए वो दोबारा न होने पाये| इसके लिए मौजूदा हालात कुछ ऐसे विश्व गुरुओं की नुमाइंदगी की आवश्यकता सिद्ध कर रहे हैं जो समग्र विश्व को किसी और संकट में ले जाने से रोक सके|
दोस्तों, ये तो हैं वैश्विक स्तर की रणनीतियों की निर्णायक बातें लेकिन यदि हम अपने देश भारत की बातें करें तो इतना कुछ झेल चुके राष्ट्र के इतिहास की गवाही, यहाँ का लगभग 1 लाख वर्ष पुराना इतिहास चीख-चीखकर दे रहा है कि जिस भारत ने अपने जीवनकाल में कभी भी किसी मुल्क पर पहले हमला नहीं किया वो कैसे अपने देश के नागरिकों के साथ ऐसा कुछ होने दे सकता है वो भी 21st Century के इस आधुनिक युग में जब पूरा राष्ट्र सजग और सतर्क है| ऐसे में अपने गौरवमयी अतीत से सबक लेते हम भारतीयों को अपनी समस्याएँ बुद्धिमतता और जागरूकता की कसौटी पर कसकर ही निपटानी चाहिए, न कि एक जन सैलाब बन किसी नेतृत्व के अगुवाई में क्योंकि इतिहास ने हमें यही सिखाया है कि अपने विवेक को खोकर हमने जब भी भेड़ चाल से कुछ हासिल करने की कोशिश की तो हमें धोखा ही मिला है और यहाँ तो बात हमारे राष्ट्र से जुड़ी समग्र विश्व को धर्म का ज्ञान देने और सामाजिक एकता का संदेश प्रसरित करने की है जिसकी गूंज पूरी दुनियाँ ने सर्व-धर्म सद्भाव के रूप में सदैव ग्रहण की ही, भले ही दुनियाँ के कई और राष्ट्रों में अलग-अलग धर्मों के लोग रह रहे हैं पर जो मिसाल सदियों को भारतीयों ने दी वो बेजोड़ थी, बेजोड़ है और बेजोड़ रहेगी| इसलिए हम भारतीयों को अपने अतीत की ओर अपने मन की उमड़ती भावनाओं को केवल मोड़ना है जहां पहुँचकर हमें उन सारे प्रश्नों के उत्तर मिल जाएंगे जिनके संशय भरे साये में हम अपने देश की छवि दुनियाँ के सामने कमजोर कर रहे हैं| दोस्तों, हम वो राष्ट्र हैं जिसके पास रामायण काल और महाभारत काल से ही मिसाइलों और परमाणु शास्त्रों को बनाए जाने का ज्ञान रहा है लेकिन भारतीयों की ऊंची सोच ने कभी भी अपनी शक्तियों की आधार पर दुनियाँ में राज करने की नहीं सोची| अब कुछ बुद्दिजीवी कहेंगे ये तो शायद बेवकूफी थी, तो मेरी सोच मुझे इसके विपरीत ले जा रही है क्योंकि दुनियाँ का इतिहास आज तक लगभग 100 अरब इन्सानों को एक-दूसरे द्वारा खुद ही मारे-काटे जाने के घटनक्रमों से भरा पड़ा है लेकिन किसी भी इंसान में इतना दम नहीं कि वो उन्हें वापस ला पाये, तो ये सब किसलिए?
मनुष्य की सबलता तो इस बात में होनी चाहिए कि वो इस धरती को अपने शांति के हथियारों से स्वर्ग बनाए न कि इसे नर्क बनाकर  किसी और ग्रह की ओर चल दे जैसा की अब बढ़ती space खोजों और space war की शक्ल में होना शुरू भी हो चुका है और रही अपने राष्ट्र की बात तो  दोस्तों हमारी सोच की कण-कण में जब मात्र भारत ही बसेगा, तो ही हम हमारी आपसी कटुता और क्लेश से निपट सकेंगे|
तो आइये बस अपने सपनों का भारत हम-सब मिलकर बनाएँ....






मंगलवार, 31 दिसंबर 2019

नववर्ष 2020 की हार्दिक शुभकामनाएँ

नववर्ष 2020 की हार्दिक शुभकामनाएँ



जाती सर्द हवाएँ, देती खुशियों का पैगाम |
सिमट चुका है साल पुराना, यादों की चादर तान||
युग्मित बेला गान कर रही, मिलन और जुदाई का |
सूर्य रश्मि की स्वर्णिम आभा, देती है संदेश ||
चमक उठो तुम नये वर्ष में, बन किरणों का तेज |
भेद चलो तुम अधियारे को, उजियारे की ओर |
निर्मम हो कितनी बाधाएँ, बढ़ो लक्ष्य की ओर ||
साहस और सबलता से, तुम जीतोगे हर जंग |
मन में धीरज धरे चले चलो, बस मंजिल की ओर ||
सूर्य रश्मि की स्वर्णिम आभा देती है संदेश...
             (  स्वरचित रश्मि श्रीवास्तव “कैलाश कीर्ति”)

इन पंक्तियों के साथ --- आप सभी को मेरी तरफ से नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ

रविवार, 22 दिसंबर 2019

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी से प्रभावित संसार लेकिन दूर होता भारत

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी



ये कहाँ आ गए हैं हम... आखिर क्यों भूलते जा रहे हैं अपनी विरासत को जिसने सिर्फ हमें मूल्यों के मायने ही तो समझाए हैं, जिनपर चलकर इस देश ने सिर्फ और सिर्फ ये जाना है कि कैसे चारों ओर नकारात्मक शक्तियों की मौजूदगी के बावजूद भी इंसानियत को जिंदा रखा जा सकता है वो भी बिना असत्य/हिंसा के मार्ग पर चले| दोस्तों, बेहद अफसोसजनक हैं ये हालात जो हमारे देश को इस हिंसा की चपेट में ढकेलते चले जा रहे हैं और जिसके परिणाम में हम अपनी अनमोल जन धरोहरों के साथ बस देश की अमूल्य धरोहरों को खोते जा रहे हैं और वहीं दूसरी ओर पूरी दुनियाँ में बढ़ती जा रही हिंसक प्रवृत्तियों को कम करने के लिए हमारे राष्ट्रपिता “बापू” के विचारों की विरासत को आगे बढ़ाने के उपाय किए जा रहे हैं जिसका जीता जागता उदाहरण है दुनियाँ के सुपर पावर अमेरिका द्वारा अमेरिका की संसद में गांधी जी के विरासत को बढ़ावा देने वाले बिल का पेश किया जाना जिसके जरिये अमेरिका के दिग्गज नागरिक अधिकार नेता जॉन लुईस ने महात्मा गांधी और मार्टिन लूथर किंग (Martin Luther King) के विरासत को बढ़ावा देने के लिए एक विधेयक प्रतिनिधि सभा में पेश किया जिसमें आने वाले 5 वर्षों के लिए 150 मिलियन अमेरिकी डॉलर के बजटीय आवंटन की मांग की गयी है|
दोस्तों, अमेरिकी हाउस में पेश किए गए इस बिल को 6 डेमोक्रेट्स (Democrats) सांसदों का भी समर्थन हासिल हुआ है जिसमें 3 भारतीय मूल के डॉ० एमी बेरा, रो खन्ना और प्रमिला जयपाल भी शामिल हैं इनके अलावा 3 काँग्रेस नेता ब्रेंडा लॉरेंस, ब्रांड शेरमैन और जेम्स मैक गवर्न शामिल हैं| दोस्तों, अमेरिकी हाउस में पेश इस बिल को मिले 3 भारतीयों के समर्थन इस बात को सिद्ध कर रहे हैं कि हम भारतीय विदेशों में गांधी जी के मूल्यों की वकालत कर उन्हें पूरी दुनियाँ को सिखाने की भूमिका निभा रहे हैं तो भारत में क्यों नहीं| मौजूदा हालत में हिंसा को छोड़ गांधी जी के बताए अहिंसा के मार्ग पर चलकर अपनी बात लोगों तक पहुंचाने की आशा लिए, जय हिन्द, जय भारत...

रविवार, 1 दिसंबर 2019

आक्रोश

आक्रोश

मौन कर दी है लेखनी…
जगा दो इस समाज को,
कलंक बन चुके हैं जो,
मिटा दो इनका अक्स तुम,
बस इस समाज से,
निर्द्वंद से हैं घूमते,
समाज के ये भेड़िये,
धधक रही है अग्नि सी,
चेतना मूर्छित किए,
क्यूँ हुआ, कैसे हुआ
ये अब सोच से भी, है परे
ज्ञान की ज्योति का,
इन पर नहीं असर कोई,
इन्हें तो बस चाहिए, वेदना ही वेदना
ना कोई संवेदना,  
मिटा दो इनका अक्स तुम,
बस इस समाज से......(रश्मि श्रीवास्तव “कैलाशकीर्ति”)

मन के हर कोने को झकझोरती प्रियंका की यादें बस चीत्कार कर हम कलम के योद्धाओं को एक ही आवाज दे रही है, बस अब बहुत हुआ ये सबकुछ, लिखने-लिखाने से परे हटकर, आओ हम सब मिलकर समाज की इस वीभत्सता को रोकने के लिए हर पल एक आंदोलन चलाएँ ताकि रुक जाए, ये सबकुछ किसी भी तरह बस रुक जाए...